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चमत्कारिक तेल

उमेश पाण्डे

प्रकाशक : निरोगी दुनिया प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :252
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 9417
आईएसबीएन :9789385151071

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भृंगराज तेल


केश तथा शिर के लिये जितना परम प्रभावी एवं उपयोगी तेल भृंगराज तेल है, उतना अन्य कोई भी तेल नहीं है। इस तेल का सिद्धिकरण भी आसान है। इसको सिद्ध करने हेतु बराबर-बराबर मात्रा में लौह किट्ट, हरड़, बहेड़ा, आंवला तथा सारिवा लें। इन सभी पदार्थों का कल्क करें। ये कल्क जितना हो उससे 4 गुना तिल का तेल लें तथा जितनी कल्क की मात्रा हो उतनी ही मात्रा में भांगरे का रस लें। इन सभी को अर्थात् कल्क, तिल का तेल तथा भागरे का रस, इनको मिलाकर अग्नि पर इतना पकायें कि सम्पूर्ण जल तत्व जल जाये और मात्र तेल बाकी रहे, तब इसे उतारकर छान लें। यही छना हुआ भृगराज तेल है। यह तेल केश एवं शिरो रोगों में परम प्रभावी है। इसके प्रमुख महत्वपूर्ण उपयोग निम्नानुसार हैं:-

> कई बार अनेक व्यक्तियों के बाल असमय पक जाते हैं। कई बार तो बच्चे जब 12-15 वर्ष के होते हैं, तभी से उनके बाल पकने लग जाते हैं। जिस व्यक्ति के बाल 30-32 वर्ष की आयु के पहले ही सफेद होने लगें तो निश्चय ही इसे बालों का असमय पकना कहा जा सकता है। बालों के असमय पकने की स्थिति में नित्य सिर में भृंगराज तेल लगाने से परम लाभ होता है। इसके नियमित प्रयोग से बालों का सफेद होना रुक जाता है तथा बहुत जल्दी सफेद हुये बाल जड़ से काले निकलने लगते हैं। जो व्यक्ति इस तेल का प्रयोग प्रारंभ से ही करता है, उसके बाल काफी लम्बे समय तक काले बने रहते हैं।

> कभी-कभी किसी व्यक्ति के दाढ़ी के बाल अचानक झड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में उसकी बड़ी विचित्र स्थिति हो जाती है। इस अवस्था में दाढ़ी पर नित्य कुछ दिनों तक भृगराज तेल की मालिश करने से वहां के बाल पुनः आने लग जाते हैं। यही बात मूंछ के बालों पर भी लागू होती है। बाल झड़ने के परिणामस्वरूप चिकनी हो चुकी मूंछ पर भी मूंगराज तेल प्रभावी असर करता है।

> कभी-कभी सिर के किसी क्षेत्र के बाल लुप्त हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप सिर पर एकाधिक चिकने स्थान दृष्टिगोचर होते हैं। ऐसी स्थिति में भी भृगराज तेल के लगाने से परम लाभ होता है।

> तनाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न शिरोपीड़ा की स्थिति में सिर में भृगराज के तेल की मालिश करने से लाभ होता है! कहा तो यहां तक गया है कि जो व्यक्ति नित्य भृगराज तेल लगाता है, वह दारूण शिरोरोगों से मुक्त रहता है। > भृगराज तेल का प्रयोग करने से कण्डुरोग में भी लाभ होता है।

> जिन स्त्रियों के बाल कम घने हों, रूक्ष हों, बाल ज्यादा टूटते हों, दोमुँहे बाल हों तो उन्हें भी भृगराज तेल का नित्य प्रयोग करना चाहिये। ऐसा करने से उनके बाल लम्बे, घने, चमकदार तथा स्वस्थ हो जाते हैं।

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    अनुक्रम

  1. जीवन का आधार हैं तेल
  2. तेल प्राप्त करने की विधियां
  3. सम्पीड़न विधि
  4. आसवन विधि
  5. साधारण विधि
  6. तेलों के सम्बन्ध में कुछ विशेष जानकारियां
  7. नारियल का तेल
  8. अखरोष्ट का तेल
  9. राई का तेल
  10. करंज का तेल
  11. सत्यानाशी का तेल
  12. तिल का तेल
  13. दालचीनी का तेल
  14. मूंगफली का तेल
  15. अरण्डी का तेल
  16. यूकेलिप्टस का तेल
  17. चमेली का तेल
  18. हल्दी का तेल
  19. कालीमिर्च का तेल
  20. चंदन का तेल
  21. नीम का तेल
  22. कपूर का तेल
  23. लौंग का तेल
  24. महुआ का तेल
  25. सुदाब का तेल
  26. जायफल का तेल
  27. अलसी का तेल
  28. सूरजमुखी का तेल
  29. बहेड़े का तेल
  30. मालकांगनी का तेल
  31. जैतून का तेल
  32. सरसों का तेल
  33. नींबू का तेल
  34. कपास का तेल
  35. इलायची का तेल
  36. रोशा घास (लेमन ग्रास) का तेल
  37. बादाम का तेल
  38. पीपरमिण्ट का तेल
  39. खस का तेल
  40. देवदारु का तेल
  41. तुवरक का तेल
  42. तारपीन का तेल
  43. पान का तेल
  44. शीतल चीनी का तेल
  45. केवड़े का तेल
  46. बिडंग का तेल
  47. नागकेशर का तेल
  48. सहजन का तेल
  49. काजू का तेल
  50. कलौंजी का तेल
  51. पोदीने का तेल
  52. निर्गुण्डी का तेल
  53. मुलैठी का तेल
  54. अगर का तेल
  55. बाकुची का तेल
  56. चिरौंजी का तेल
  57. कुसुम्भ का तेल
  58. गोरखमुण्डी का तेल
  59. अंगार तेल
  60. चंदनादि तेल
  61. प्रसारिणी तेल
  62. मरिचादि तेल
  63. भृंगराज तेल
  64. महाभृंगराज तेल
  65. नारायण तेल
  66. शतावरी तेल
  67. षडबिन्दु तेल
  68. लाक्षादि तेल
  69. विषगर्भ तेल

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